Mahabodhi Mahavihara Mukti Andolan: Bauddh Samuday ke Niyantran aur 1949 ke Bodhgaya Mandir Adhiniyam ko Nirast Karne ki Maang

22.08.26 12:53 PM - By dhammashikharjyotideo

महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन: बौद्ध समुदाय के नियंत्रण और 1949 के बोधगया मंदिर अधिनियम को निरस्त करने की मांग

महाबोधि महाविहार बोधगया को पूर्णतः बौद्ध समुदाय के नियंत्रण में सौंपने और 1949 के बोधगया मंदिर अधिनियम (बीटी एक्ट) को निरस्त करने की मांग को लेकर महाबोधि महाविहार बोधगया मुक्ति आंदोलन राष्ट्रीय समिति का देशव्यापी शांतिपूर्ण आंदोलन जारी है।

मुख्य मांगें और प्रदर्शन

  • जंतर-मंतर पर प्रदर्शन: 10 अगस्त को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक दिवसीय शांति धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया, जिसमें भारी बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में बौद्ध भिक्षु, उपासक-उपासिकाएं, युवा, महिलाएं और समर्थक शामिल हुए।

  • लंबा धरना: महाविहार की मुक्ति को लेकर शांतिपूर्ण धरना 550 दिनों से अधिक समय से जारी है। दिल्ली में आयोजित प्रदर्शन का नेतृत्व महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन राष्ट्रीय समिति के महासचिव डॉ. आकाश लामा ने किया।

  • आगामी भूख हड़ताल: आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए 23 अगस्त 2026 से पटना में मुख्यमंत्री आवास के सामने पांच दिवसीय भूख हड़ताल एवं शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा।

समिति द्वारा उठाए गए मुख्य मुद्दे

  • आध्यात्मिक महत्व: राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पूज्य भदन्त धम्मशिखर जी ने बताया कि महाबोधि महाविहार भगवान गौतम बुद्ध की ज्ञानभूमि है, जहां उन्हें बोधि की प्राप्ति हुई थी, और इस पवित्र स्थल का पूर्ण प्रबंधन बौद्ध समुदाय को मिलना चाहिए।

  • बीटी एक्ट 1949 पर आपत्ति: आंदोलनकारियों के अनुसार 1949 का बीटी एक्ट बौद्ध धार्मिक स्थल के प्रबंधन में गैर-बौद्ध हस्तक्षेप को वैधानिक आधार देता है, जिसे वे बौद्ध समुदाय के धार्मिक, ऐतिहासिक और संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन मानते हैं। वे बोधगया मंदिर प्रबंधन समिति (बीटीएमसी) में बौद्धों का पूर्ण प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने तथा बौद्ध धार्मिक स्थलों में राज्य के अनुचित हस्तक्षेप को समाप्त करने की मांग कर रहे हैं।

  • कानूनी स्थिति: महाबोधि महाविहार की मुक्ति से संबंधित मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, जिसकी अगली सुनवाई की तारीख 6 अक्टूबर 2026 है।

समुदाय से अपील

समिति ने बौद्ध समाज से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से इसमें भाग लेने का आह्वान किया है। आयोजकों ने जोर देकर कहा कि यह संघर्ष केवल महाबोधि महाविहार की मुक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि करुणा, मैत्री, समता और बुद्ध धम्म की गरिमा एवं अधिकारों की रक्षा का संघर्ष है। इसके साथ ही, आंदोलन के नाम पर धोखाधड़ी करने वालों से सावधान रहने तथा केवल अधिकृत नेतृत्व और समिति के निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।

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